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Indian Politics: पूर्व IAS दिव्या मित्तल की राजनीति में एंट्री, बोलीं- किसी दल के साथ नहीं जनता के साथ करूंगी राजनीति

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | पूर्व IAS अधिकारी दिव्या मित्तल ने राजनीति में आने का ऐलान किया है। उन्होंने किसी राजनीतिक दल से जुड़ने के बजाय जनता के साथ स्वतंत्र राजनीतिक मंच बनाने की बात कही।

पूर्व IAS दिव्या मित्तल की राजनीति में एंट्री, बोलीं- जनता के साथ मिलकर बनाएंगी स्वतंत्र मंच

उत्तर प्रदेश कैडर की पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने प्रशासनिक सेवा से अलग होने के बाद अब सक्रिय राजनीति में कदम रखने का ऐलान किया है। 2013 बैच की अधिकारी रहीं दिव्या मित्तल ने कहा है कि वह किसी राजनीतिक दल के साथ जुड़ने के बजाय सीधे जनता के बीच जाकर अपनी राजनीतिक पहल शुरू करेंगी। उनका कहना है कि राजनीति का केंद्र आम लोगों की समस्याएं और उनके मुद्दे होने चाहिए।

दिव्या मित्तल ने अपने वीडियो संदेश में कहा कि वह जनता के सहयोग से एक स्वतंत्र राजनीतिक मंच खड़ा करना चाहती हैं। उन्होंने उत्तर प्रदेश को अपनी कर्मभूमि बताते हुए यहीं से राजनीतिक सफर शुरू करने की बात कही है।

प्रशासनिक अनुभव के बाद राजनीति का फैसला

दिव्या मित्तल ने अगस्त 2026 के अंत में आईएएस से इस्तीफा देने की घोषणा की थी। उनका करीब 13 साल का प्रशासनिक सफर रहा। इस्तीफा स्वीकार होने के कुछ ही समय बाद उन्होंने राजनीति में आने का फैसला सार्वजनिक किया।

आईएएस अधिकारी के रूप में उन्होंने उत्तर प्रदेश के कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया। वह मिर्जापुर की जिलाधिकारी भी रह चुकी हैं। मिर्जापुर में उनके कार्यकाल के दौरान दूरदराज के गांवों में पेयजल सुविधा पहुंचाने की पहल को काफी चर्चा मिली थी।

स्कूल, रोजगार और पेपर लीक पर फोकस

राजनीति में आने की वजह बताते हुए दिव्या मित्तल ने प्रशासनिक कार्यकाल के अनुभवों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कई बार सरकारी मंजूरी और बजट उपलब्ध होने के बावजूद योजनाएं जमीन पर नहीं पहुंच पातीं।

उन्होंने स्कूल निर्माण, जमीन के पट्टे, सड़क और दूसरी बुनियादी सुविधाओं से जुड़े सवाल उठाए। युवाओं के भविष्य और परीक्षा में पेपर लीक जैसे मुद्दों को भी उन्होंने अपनी राजनीतिक पहल का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया है।

मिर्जापुर के लहुरियादह गांव का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि वहां बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी जरूरतों को लेकर उन्हें प्रशासनिक स्तर पर काम करने का मौका मिला था। इसी तरह के अनुभवों को अब वह राजनीतिक स्तर पर उठाना चाहती हैं।

किसी पार्टी का झंडा नहीं उठाने की बात

दिव्या मित्तल ने साफ किया है कि उनकी राजनीति फिलहाल किसी राजनीतिक दल के साथ जुड़कर नहीं होगी। उनका कहना है कि वह जनता के साथ मिलकर काम करना चाहती हैं और ऐसा राजनीतिक मंच बनाना चाहती हैं जिसमें पैसे, बाहुबल या जाति-धर्म के बजाय लोगों के मुद्दे केंद्र में रहें।

उन्होंने अपने इस्तीफे के बाद सोशल मीडिया पर हुई कुछ चर्चाओं और राजनीतिक टिप्पणियों का भी जिक्र किया। उनका कहना था कि ऐसी बातों से वह डरने वाली नहीं हैं।

2027 के विधानसभा चुनाव पर भी नजर?

दिव्या मित्तल की राजनीतिक घोषणा ऐसे समय हुई है जब उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव की तैयारी का दौर शुरू हो चुका है। हालांकि उन्होंने अभी किसी सीट से चुनाव लड़ने की औपचारिक घोषणा नहीं की है।

मिर्जापुर से उनका पुराना प्रशासनिक जुड़ाव होने के कारण उनके वहां से चुनाव लड़ने की संभावनाओं को लेकर चर्चा जरूर शुरू हो गई है। लेकिन फिलहाल इसे संभावित राजनीतिक विकल्प के तौर पर ही देखा जा रहा है, किसी घोषित उम्मीदवारी के रूप में नहीं।

राजनीतिक दलों से मिले अलग-अलग संकेत

दिव्या मित्तल की राजनीतिक एंट्री के बाद अलग-अलग राजनीतिक नेताओं की प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। कुछ नेताओं ने उनके राजनीति में आने का स्वागत किया और उन्हें अपने राजनीतिक दल के साथ जुड़ने का निमंत्रण दिया।

वहीं कुछ नेताओं ने यह भी कहा कि प्रशासनिक सेवा और चुनावी राजनीति की कार्यशैली अलग होती है। ऐसे में अब दिव्या मित्तल के सामने जनता के बीच अपना स्वतंत्र राजनीतिक आधार तैयार करने की चुनौती होगी।

नौकरशाही से राजनीति का रास्ता नया नहीं

भारत की राजनीति में ऐसे कई उदाहरण रहे हैं, जब आईएएस या दूसरे प्रशासनिक पदों पर रहे लोगों ने नौकरी छोड़कर सक्रिय राजनीति का रास्ता चुना।

पूर्व आईएएस अधिकारी अजीत जोगी ने प्रशासनिक सेवा छोड़ने के बाद राजनीति में प्रवेश किया और आगे चलकर छत्तीसगढ़ के पहले मुख्यमंत्री बने। यशवंत सिन्हा ने भी आईएएस छोड़कर सक्रिय राजनीति का रास्ता अपनाया और केंद्र में वित्त तथा विदेश मंत्री की जिम्मेदारी संभाली।

पूर्व आईएएस अधिकारी आरके सिंह भी प्रशासनिक सेवा के बाद राजनीति में आए और आरा से लोकसभा चुनाव जीतकर केंद्र सरकार में मंत्री बने। पीएल पुनिया ने भी आईएएस सेवा के बाद राजनीति में प्रवेश किया और सांसद रहे।

आरसीपी सिंह और दूसरे उदाहरण

प्रशासनिक सेवा छोड़कर राजनीति में आने वालों में आरसीपी सिंह का नाम भी शामिल रहा है। वह बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ प्रशासनिक भूमिका में रहे और बाद में राजनीति में आए। उन्होंने राज्यसभा सदस्य के रूप में राजनीतिक सफर शुरू किया और केंद्र में मंत्री भी बने।

हाल के वर्षों में भी कई पूर्व नौकरशाहों ने राजनीति का रुख किया है। इसी कड़ी में दिव्या मित्तल की एंट्री को भी देखा जा रहा है।

शाह फैसल का सफर रहा अलग

जम्मू-कश्मीर कैडर के पूर्व आईएएस अधिकारी शाह फैसल का उदाहरण इससे अलग तरह का रहा। उन्होंने 2019 में आईएएस से इस्तीफा देकर राजनीति में प्रवेश किया और जम्मू-कश्मीर पीपुल्स मूवमेंट नाम की पार्टी बनाई। बाद में उन्होंने सक्रिय राजनीति छोड़ दी और 2022 में उन्हें फिर प्रशासनिक सेवा में वापस लिया गया।

दिव्या मित्तल के मामले में फिलहाल तस्वीर अलग है। उन्होंने स्वतंत्र राजनीतिक मंच के जरिए जनता के बीच जाने की बात कही है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि उनका यह राजनीतिक प्रयोग किस रूप में आगे बढ़ता है और क्या वह चुनावी राजनीति में भी सीधे उतरती हैं।

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